बूंदी। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे तीन गांवों के ग्रामीणों के स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुलखेड़ी, भीमगंज और बाड़ा धूंधला के ग्रामीणों को टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर खटकड़ के पास बसाने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए आवश्यक प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की 24 सितंबर को हुई बैठक में खटकड़ के निकट केसरपुरा वनखंड की 244.9723 हेक्टेयर वन भूमि को राजस्व भूमि में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। प्रस्ताव अब केंद्रीय स्तर पर अनुमोदन के लिए भेजे जा रहे हैं। स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित ग्रामीणों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
राजस्थान वन विभाग की जानकारी के अनुसार रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में गांवों का पुनर्वास स्वैच्छिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है और पुनर्वास के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान तथा पुनर्वास योजना तैयार करना प्रक्रिया का हिस्सा है।
भैरूपुरा में 146 परिवारों को पहली किश्त
कोर क्षेत्र के भैरूपुरा गांव में भी विस्थापन की प्रक्रिया जारी है। गांव के कुल 208 परिवारों में से करीब 146 परिवारों को नकद पैकेज की पहली किश्त तथा 16 परिवारों को दूसरी किश्त मिल चुकी है। पहली किश्त के रूप में तीन लाख रुपये और दूसरी किश्त के रूप में साढ़े सात लाख रुपये खातों में हस्तांतरित किए गए हैं। शेष साढ़े चार लाख रुपये की एफडी कराए जाने का प्रावधान बताया गया है।
बजट के अभाव में अभी शेष परिवारों को राशि नहीं मिल सकी है। वहीं भीमगंज और बाड़ा धूंधला के ग्रामीणों के विस्थापन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है और दोनों गांवों के ग्रामीणों से विकल्प फॉर्म भरवाए गए हैं।
गुलखेड़ी के 162 परिवार गांव छोड़ चुके
गुलखेड़ी गांव में विस्थापन की प्रक्रिया सबसे पहले शुरू हुई थी। यहां अब तक 162 परिवार गांव छोड़ चुके हैं, जबकि 51 परिवार भूमि पैकेज मिलने का इंतजार कर रहे हैं। केसरपुरा के पास भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से इन परिवारों के विस्थापन का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद है। गांव में दो परिवार ऐसे हैं जिन्होंने विस्थापन का विकल्प नहीं चुना है और वे यहीं रहना चाहते हैं।
आठ गांवों के करीब दो हजार परिवारों का होना है विस्थापन
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के आठ गांवों में करीब दो हजार परिवार निवास कर रहे हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से रिजर्व क्षेत्र से बाहर बसाने की योजना है। इनमें जैतपुर रेंज का भीमगंज तथा रामगढ़ रेंज के केशवपुरा, भैरूपुरा, गुड़ा मकदू, जावरा, जावरा की झोपड़ियां, गुलखेड़ी और बाड़ा धूंधला शामिल हैं।
इन आठ गांवों में अभी तक गुलखेड़ी में ही आंशिक रूप से विस्थापन हो सका है। राजस्थान वन विभाग रामगढ़ विषधारी को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व के रूप में सूचीबद्ध करता है और इसके लिए अलग टाइगर कंजर्वेशन प्लान भी उपलब्ध है।
ग्रामीणों को केश या भूमि पैकेज चुनने का विकल्प
टाइगर रिजर्व से विस्थापन की प्रक्रिया स्वैच्छिक है। ग्रामीणों को केश अथवा भूमि पैकेज में से विकल्प चुनने की सुविधा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केश पैकेज में प्रति परिवार तीन किश्तों में 15 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है, जिसमें साढ़े चार लाख रुपये की एफडी शामिल है।
वहीं भूमि पैकेज के तहत खातेदारी भूमि के अलावा भूमि की सिंचित या असिंचित स्थिति के आधार पर करीब एक से डेढ़ हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन तथा 3.70 लाख रुपये देने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे खातेदार जो वर्तमान में गांव में निवास नहीं करते, लेकिन विस्थापित होने वाले गांव में उनकी खातेदारी भूमि है, उन्हें नगरीय सीमा से दूरी के आधार पर डीएलसी दर से अधिक राशि के भुगतान का प्रावधान बताया गया है।
खटकड़ के पास भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुलखेड़ी, भीमगंज और बाड़ा धूंधला के ग्रामीणों के विस्थापन को गति मिलने की संभावना है।
