नागरिक अभिव्यक्ति @ रावतभाटा
जीवन के बाद भी दूसरों के काम आने का संकल्प कितना बड़ा हो सकता है, इसकी मिसाल रावतभाटा के विनय कुमार जैन ने पेश की है। निधन के बाद उनके नेत्रदान के साथ पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया। रावतभाटा में इसे पहला देहदान बताया गया है। उनके इस निर्णय ने न केवल परिवार के संकल्प और संवेदनशीलता को सामने रखा, बल्कि समाज को नेत्रदान और देहदान के महत्व का संदेश भी दिया।
विनय कुमार जैन राजस्थान परमाणु बिजलीघर (आरएपीपी) की इकाई 1 एवं 2 में सेवाएं दे चुके थे। वे एक्स फोरमैन-बी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। मानव सेवा के लिए देहदान का विचार उन्हें अपने मामाजी से प्रेरित होकर आया। मामाजी के देहदान से प्रभावित होकर उन्होंने अप्रैल 2013 में अपना शरीर कोटा मेडिकल कॉलेज को दान करने का संकल्प लिया था। उनके पुत्र पंकज जैन और अशोक जैन ने इस संकल्प से जुड़ी जानकारी साझा की।
13 साल पुराना संकल्प हुआ पूरा
विनय कुमार जैन ने करीब 13 वर्ष पहले जो संकल्प लिया था, वह उनके निधन के बाद पूरा हुआ। परिवार ने उनके निर्णय का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रिया में सहयोग किया। नेत्रदान के साथ पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित किए जाने से उनका यह फैसला दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गया। देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सा अध्ययन में मदद मिलती है।
कोटा मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग की वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की टीम ने शाम 5 बजे विनय कुमार जैन का पार्थिव शरीर देहदान के रूप में प्राप्त किया। यह कॉलेज का 72वां देहदान और वर्ष 2026 का अब तक का सातवां देहदान है।
डॉ. जायसवाल ने इस पुनीत कार्य में सहयोग के लिए जैन परिवार का आभार जताया। उन्होंने परिवार की पहल को मानवता और चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया। विनय कुमार जैन का निर्णय यह संदेश देता है कि देहदान और नेत्रदान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी समाज की सेवा कर सकता है।
