तकनीकी शिक्षा तेजी से बदल रही है। आज विद्यार्थियों को ऐसे कौशल और व्यावहारिक अनुभव की जरूरत है, जो उन्हें बदलती तकनीक और रोजगार की नई मांगों के अनुरूप तैयार कर सके। आरटीयू, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस होकर देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हम इसे तकनीकी शिक्षा का बेहतरीन मॉडल बना रहे है। विवि में 8 नई फैकल्टी के गठन, 240 सीटों की क्षमता वाले नए चार वर्षीय बीसीए ऑनर्स कार्यक्रम और 'मल्टीपल एंट्री-एग्जिट' सिस्टम को धरातल पर लागू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय का स्पष्ट संकल्प है कि अब यहाँ पारंपरिक शिक्षा के बजाय 'ग्लोबल जॉब क्रिएटर' यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार देने वाले युवा तैयार किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे को विस्तार देते हुए 8 नई फैकल्टी में निर्माण एवं पर्यावरण, सामग्री विज्ञान, यांत्रिक एवं अनुप्रयुक्त इंजीनियरिंग, कंप्यूटर एवं संचार इंजीनियरिंग, ऊर्जा एवं पर्यावरण, प्रबंधन अध्ययन, कला और विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी के लिए डीन भी नियुक्त किए जा चुके हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय बीसीए ऑनर्स कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। इसके लिए 240 विद्यार्थियों की क्षमता और 9 नए शिक्षकीय पदों का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।
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उद्योगों और विश्वविद्यालय के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए नई 'औद्योगिक परामर्श नीति' तैयार की गई है।
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विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अशैक्षणिक कर्मचारियों को वर्षों से लंबित पदोन्नति लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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नई व्यवस्था विकसित की गई हैं, जिनके माध्यम से उद्योग, शिक्षा और शोध क्षेत्र के विशेषज्ञ विद्यार्थियों के साथ अपना अनुभव साझा कर सकेंगे।
जॉब सीकर नहीं, नई तकनीक विकसित करने वाले बनेंगे छात्र
विश्वविद्यालय विद्यार्थियों और शोधार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने, नए उत्पाद विकसित करने और उद्योगों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध करवा रहा हैं। अनुसंधान और पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है। एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी नई तकनीकों को पाठ्यक्रम और शोध गतिविधियों का हिस्सा बनाया जा रहा है। उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाला बनाना है। अगले पांच वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, उद्योगों से साझेदारी, डिजिटल शिक्षण और नवाचार के आधार पर आरटीयू को देश के अग्रणी तकनीकी विश्वविद्यालयों में शामिल करना हमारा लक्ष्य है।
