कोटा। राजस्थान की वीरता, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को बच्चों ने मंच पर जीवंत कर दिया। KDA ऑडिटोरियम में चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (CFCL), गड़ेपान और के.के. बिरला मेमोरियल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में वार्षिक उत्सव ‘समवर्तिका 10.0’ आयोजित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘मरुधरा जहां माटी बोलती है’ रही। इसके तहत 57 सरकारी स्कूलों और 47 आंगनबाड़ी केंद्रों के 300 से अधिक बच्चों ने लघु नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की विरासत को दर्शाया।
महाराणा प्रताप की वीरता से घूमर तक की झलक
कार्यक्रम में बच्चों ने महाराणा प्रताप और उनके घोड़े चेतक की वीरता, हल्दीघाटी युद्ध और रानी पद्मिनी के जौहर जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। इसके साथ ही मेहरानगढ़ किले की भव्यता, बिश्नोई समाज की खेजड़ी संरक्षण परंपरा और जंतर-मंतर की वैज्ञानिक विरासत को भी दर्शाया गया।
राजस्थान के लोकनृत्यों में घूमर और कालबेलिया की प्रस्तुतियों के साथ हाड़ौती की सांस्कृतिक पहचान भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। बच्चों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा गया।
ग्रामीण बच्चों को मंच देना सराहनीय : जिला कलेक्टर
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने कहा कि CFCL की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए इतना बड़ा मंच उपलब्ध कराना सराहनीय है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी कला, रचनात्मकता और आत्मविश्वास प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
1,200 बच्चों से शुरू हुआ शिक्षा कार्यक्रम, अब 10 हजार से अधिक तक पहुंचा
CFCL प्रबंधन के अनुसार, कंपनी के शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत करीब 1,200 बच्चों से हुई थी। वर्तमान में इस कार्यक्रम से 10,000 से अधिक बच्चे जुड़ चुके हैं। प्रबंधन ने यह भी बताया कि कंपनी के सहयोग से क्षेत्र के बच्चों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक हासिल किए हैं।
‘समवर्तिका 10.0’ के माध्यम से बच्चों को राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकपरंपराओं से जोड़ने के साथ उनकी प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया गया।
