बूंदी, 30 सितंबर। सैंड स्टोन सप्लाई चेन में बालश्रम की रोकथाम एवं उन्मूलन तथा बाल श्रमिकों के रेस्क्यू और पुनर्वास को लेकर मंगलवार को माय भारत केंद्र, युवा एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार कार्यालय, बूंदी में विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में बालश्रम की पहचान, त्वरित कार्रवाई, बच्चों के संरक्षण एवं पुनर्वास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता श्रम कल्याण अधिकारी बूंदी अंकिता महर्षि ने की। आईएलओ के बृजेश पांडे एवं एक्शनएड एसोसिएशन की स्टेट हेड सिओन कोनगाड़ी के सानिध्य में आयोजित बैठक में सरकारी विभागों, बाल संरक्षण तंत्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक की शुरुआत एक्शनएड-आईएलओ जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने की। उन्होंने परियोजना के उद्देश्य और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बालश्रम के उन्मूलन के लिए केवल रेस्क्यू कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। बच्चों की पहचान और रेस्क्यू के साथ उनके पुनर्वास, शिक्षा से जुड़ाव तथा परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग के संरक्षण अधिकारी गोविंद कुमार गौतम ने डाबी क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और बालश्रम उन्मूलन के लिए विभागीय समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
मानव तस्करी विरोधी यूनिट की सहायक उप निरीक्षक अमीना खान ने बालश्रम और बाल तस्करी से जुड़े मामलों में रेस्क्यू की प्रक्रिया तथा आवश्यक कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने समय पर सूचना मिलने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के प्रभारी रामनारायण ने शिकायत मिलने के बाद हेल्पलाइन की भूमिका, बच्चों के रेस्क्यू और आवश्यक सहायता एवं संरक्षण की प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने आमजन से बालश्रम से जुड़े मामलों की सूचना संबंधित तंत्र तक पहुंचाने की अपील की।
महिला अधिकारिता विभाग की पूर्णिमा गौतम ने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में साथिनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जाजम बैठकों के माध्यम से परिवारों और समुदायों के बीच बाल अधिकार, शिक्षा और बालश्रम के दुष्प्रभावों को लेकर नियमित संवाद बढ़ाने की बात कही।
श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों पर भी चर्चा
आईएलओ प्रतिनिधि बृजेश पाठक ने बालश्रम की रोकथाम के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, अधिकारों और सुरक्षित कार्यस्थल पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि बालश्रम की रोकथाम के प्रयासों को श्रमिक परिवारों की आजीविका और कार्यस्थल की सुरक्षा से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।
एक्शनएड एसोसिएशन की स्टेट हेड सिओन कोनगाड़ी ने अब तक किए गए प्रयासों की समीक्षा करते हुए आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बालश्रम के खिलाफ स्थायी बदलाव के लिए सरकारी विभागों, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संगठनों, स्वयंसेवकों, युवा समूहों और समुदाय की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। इस दौरान बालश्रम की पहचान एवं रोकथाम के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के उपयोग हेतु तैयार टूलकिट के बारे में भी जानकारी दी गई।
रेस्क्यू के बाद पुनर्वास पर भी ध्यान
श्रम कल्याण अधिकारी अंकिता महर्षि ने बालश्रमिकों के रेस्क्यू के दौरान एफआईआर दर्ज करवाने, प्रकरण में उचित धाराएं लगाने, बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास प्रमाण-पत्र और तत्काल सहायता सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बालश्रम के मामलों में रेस्क्यू के बाद बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और अधिकारों की बहाली पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
माय भारत केंद्र बूंदी के प्रतिनिधि शिवराज गुर्जर ने स्वयंसेवकों और युवा मंडलों के माध्यम से बालश्रम, बाल संरक्षण और श्रमिक सुरक्षा को लेकर गांव एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
बैठक में एक्शनएड के जगदीश पंवार सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
