नागरिक अभिव्यक्ति । सांगोद
सांगोद। कमोलर से श्री चौथ माता मंदिर भूलाहेड़ा तक सड़क के डामरीकरण की स्वीकृति को करीब 6 से 8 माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देने से हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
करीब छह माह पहले ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की ओर से कमोलर से श्री चौथ माता मंदिर भूलाहेड़ा मार्ग के डामरीकरण की स्वीकृति दिए जाने की बात सामने आई थी। स्वीकृति के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही सड़क का निर्माण शुरू होगा और वर्षों से चली आ रही परेशानी दूर होगी। लेकिन कई माह बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों का प्रमुख मार्ग
कमोलर से श्री चौथ माता मंदिर भूलाहेड़ा जाने वाला यह मार्ग केवल स्थानीय आवागमन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों के श्रद्धालु भी इसी रास्ते से मंदिर पहुंचते हैं। हर माह बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। कई श्रद्धालु पैदल भी मंदिर तक जाते हैं। सड़क खराब होने के कारण उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इसी मार्ग से आसपास के गांवों के विद्यार्थी भी प्रतिदिन स्कूल-कॉलेज के लिए आवागमन करते हैं। सड़क पर गड्ढों और उखड़ी सतह के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष परेशानी होती है।
रात में बढ़ जाता है हादसे का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार दिन में वाहन चालक गड्ढों को देखकर किसी तरह बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय स्थिति ज्यादा खतरनाक हो जाती है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण गड्ढे नजर नहीं आते और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मरम्मत और डामरीकरण की मांग कर रहे हैं।
XEN बोले- इसी सप्ताह शुरू होगा काम
सार्वजनिक निर्माण विभाग के सांगोद XEN दिनेश नागर ने बताया कि कमोलर से श्री चौथ माता मंदिर भूलाहेड़ा सड़क का कार्य इसी सप्ताह शुरू कर दिया जाएगा। विभाग की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को अब काम शुरू होने का इंतजार है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद भी यदि काम शुरू होने में इतना समय लग रहा है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब देखना यह है कि विभाग के आश्वासन के मुताबिक इसी सप्ताह सड़क का काम वास्तव में धरातल पर शुरू होता है या फिर ग्रामीणों को एक और तारीख का इंतजार करना पड़ेगा।
