नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को सुल्तानपुर पंचायत समिति क्षेत्र में मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। पंचायत समिति सदस्य की 21 और जिला परिषद सदस्य की 5 सीटों के लिए हुए मतदान में कुल 63.43 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। क्षेत्र के 1 लाख 19 हजार 84 मतदाताओं में से 75 हजार 531 मतदाताओं ने वोट डाले। मतदान पूरा होने के साथ ही सभी प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य मतपेटियों में बंद हो गया है।
सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने के बाद शुरुआती घंटों में मतदाताओं की रफ्तार धीमी रही। सुबह 10 बजे तक 11.08 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद मतदान केंद्रों पर लोगों की आवाजाही बढ़ी और दोपहर 1 बजे तक मतदान प्रतिशत 30.56 पहुंच गया। दोपहर 3 बजे तक 44.56 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे। शाम तक मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही बनी रही। मतदान प्रक्रिया करीब 6.30 बजे तक चली। पूरे दिन क्षेत्र में मतदान शांतिपूर्ण रहा और किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
अधिकारियों ने संभाली व्यवस्थाओं की निगरानी
मतदान के दौरान उपखंड अधिकारी एवं रिटर्निंग अधिकारी दीपक महावर और तहसीलदार प्रीतम कुमारी मीणा ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर सहित पुलिस एवं प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी मतदान केंद्रों का दौरा किया। अधिकारियों ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी करते हुए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर ध्यान दिया।
95 वर्षीय बुजुर्ग ने डाला वोट
मतदान में बुजुर्ग मतदाताओं की भागीदारी भी देखने को मिली। ग्राम पंचायत पड़ासलिया में 95 वर्षीय शंभुदयाल नंदवाना मतदान केंद्र संख्या 101 पर पहुंचे और मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं सिमलिया में 86 वर्षीय प्रभुलाल मीणा ने मतदान केंद्र संख्या 100 पर वोट डाला। उम्र के इस पड़ाव पर भी मतदान करने पहुंचे बुजुर्गों ने लोकतंत्र में भागीदारी का संदेश दिया।
भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों ने भी किया मतदान
चुनाव के दौरान कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह और भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर ने भी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाले। दोनों नेताओं ने मतदान के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसकी जानकारी दी।
अब सबकी नजर चुनाव परिणाम पर है। पंचायत समिति और जिला परिषद की कुल 26 सीटों के लिए हुए मतदान के बाद प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को नतीजों का इंतजार है।
