सुल्तानपुर। दशहरे पर रावण दहन से पहले ही सुल्तानपुर में रावण के पुतले की ऊंचाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका की ओर से सुल्तानपुर में 70 फीट और नोताडा में 45 फीट ऊंचा रावण तैयार करवाने की जानकारी सामने आई थी। लेकिन सुल्तानपुर के मंडी परिसर में पुतला खड़ा होने के बाद कांग्रेस पार्षदों ने इसकी ऊंचाई करीब 34 फीट बताते हुए अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। पार्षदों ने मामले की जांच करवाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
70 फीट का रावण बनाने के निर्देश, मौके पर कम ऊंचाई का दावा
कांग्रेस पार्षद मुकेश उदयराज, हर्षित शर्मा और हरिप्रकाश नागर ने सवाल उठाया कि जब नगर पालिका की ओर से 70 फीट ऊंचा रावण बनाने की जानकारी दी गई थी, तो मौके पर खड़े पुतले की ऊंचाई करीब 34 फीट कैसे रह गई।
पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका में निर्माण कार्य की शुरुआत में ही अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में भी 70 फीट का रावण तैयार किए जाने की जानकारी प्रकाशित हुई थी। ऐसे में पुतले की वास्तविक ऊंचाई और निर्माण कार्य में अपनाई गई प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
अधिकारियों से जवाब नहीं मिलने का आरोप
कांग्रेस पार्षदों ने बताया कि उन्होंने रावण के पुतले की ऊंचाई को लेकर नगर पालिका अधिकारियों से चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। पार्षदों ने मांग की कि पुतले की वास्तविक ऊंचाई की माप करवाई जाए और निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।
उन्होंने ठेकेदार को दिए गए निर्देशों, निर्माण कार्य के रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच करवाने की मांग की है, ताकि निर्धारित ऊंचाई और मौके पर तैयार पुतले के बीच अंतर की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पालिका अध्यक्ष बोलीं—जांच करवाकर पता लगाएंगे कहां हुई चूक
मामले में नगर पालिका अध्यक्ष अनीता मेघवाल ने कहा कि संबंधित ठेकेदार को 70 फीट ऊंचा रावण बनाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पुतले की ऊंचाई में अंतर क्यों रहा, इसकी जानकारी ली जाएगी और मामले की जांच करवाई जाएगी।
पालिका अध्यक्ष के अनुसार, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
रावण दहन से पहले पुतले की ऊंचाई को लेकर उठे सवालों के बाद अब नगर पालिका की जांच पर निगाहें टिकी हैं। कांग्रेस पार्षदों ने जहां अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है, वहीं पालिका अध्यक्ष ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
अब यह देखना होगा कि जांच में पुतले की वास्तविक ऊंचाई कितनी सामने आती है और निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेजों में क्या तथ्य मिलते हैं। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
