नागरिक अभिव्यक्ति | सुल्तानपुर। दीपावली पर लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों को साफ-सुथरा बनाने में जुटे हैं, वहीं सुल्तानपुर नगर की सफाई व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। त्योहार से पहले शहर को स्वच्छ रखने की चुनौती के बीच सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने नगरपालिका प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बुधवार से शुरू हुई हड़ताल में घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले टेंपो चालक भी शामिल हो गए हैं। ऐसे में दीपावली से पहले नियमित सफाई और कचरा निस्तारण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि नगरपालिका की ओर से उन्हें महज 6,446 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। उनका दावा है कि मौजूदा महंगाई के दौर में इतनी कम राशि से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों ने इटावा में सफाईकर्मियों को 9,400 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलने का हवाला देते हुए सुल्तानपुर में भी वेतन बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे कई बार अपनी मांग नगरपालिका प्रशासन के सामने रख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
एक घंटे की वार्ता भी नहीं निकाल सकी समाधान
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए नगरपालिका अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार रेगर, पालिकाध्यक्ष अनिता मेघवाल और उपाध्यक्ष नरेश शर्मा ने सफाई जमादारों एवं कर्मचारियों के साथ करीब एक घंटे तक वार्ता की। इस दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों को समझाने तथा समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन वेतन वृद्धि को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
कर्मचारी अपनी मांग पर लिखित आश्वासन देने की बात पर अड़े रहे। मांगों पर ठोस भरोसा नहीं मिलने के कारण वार्ता बेनतीजा रही और हड़ताल जारी रही। सफाई जमादार राजेश पाटनी, बंटी झावा, सत्यनारायण, दिनेश और बलराम झावा सहित अन्य कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि नहीं होने पर नाराजगी जताई।
कर्मचारी दीनदयाल डागर के अनुसार, हड़ताल शुरू करने से पहले नगरपालिका प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई थी। इसके बावजूद मांगों पर निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में बढ़ोतरी होने से उन्हें परिवार का खर्च चलाने में राहत मिलेगी।
बोर्ड की बैठक में ही हो सकता है वेतन वृद्धि पर फैसला
वेतन वृद्धि के मुद्दे पर नगरपालिका प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में निर्णय उसके स्तर पर नहीं लिया जा सकता। अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार रेगर के अनुसार, कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का फैसला नगरपालिका बोर्ड की बैठक में ही किया जा सकता है। इस कारण फिलहाल कर्मचारियों की मांग और बोर्ड के निर्णय के बीच समाधान अटका हुआ है।
हालांकि, बोर्ड की अगली बैठक कब होगी और उसमें सफाई कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के मुद्दे पर विचार किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर कर्मचारियों को स्पष्ट आश्वासन नहीं मिल पाया है। ऐसे में हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रशासन के सामने कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत जारी रखने और जल्द समाधान निकालने की चुनौती बनी हुई है।
कचरा संग्रहण टेंपो बंद होने से बढ़ी परेशानी
सफाई कर्मचारियों के साथ घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले टेंपो चालकों के हड़ताल में शामिल होने से नगर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। दीपावली से पहले घरों और दुकानों में सफाई के कारण कचरे की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे समय में कचरा संग्रहण और नियमित सफाई बाधित होने से सड़कों तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है।
पालिकाध्यक्ष अनिता मेघवाल और उपाध्यक्ष नरेश शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं डालें तथा सफाई व्यवस्था बनाए रखने में नगरपालिका का सहयोग करें। पालिका प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
त्योहार से पहले समाधान निकालना चुनौती
दीपावली के अवसर पर नगर को स्वच्छ बनाए रखना नगरपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, सफाई कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग पर अड़े हैं और लिखित आश्वासन मिलने तक हड़ताल समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कर्मचारियों की मांगों और सफाई व्यवस्था, दोनों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
अब निगाहें नगरपालिका प्रशासन के अगले कदम और बोर्ड की बैठक पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या दीपावली से पहले वेतन वृद्धि के मुद्दे पर सहमति बन पाएगी और सफाई व्यवस्था सामान्य हो सकेगी, या हड़ताल लंबी खिंचने से नगरवासियों को कचरा निस्तारण की समस्या का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल समस्या का समाधान नगरपालिका प्रशासन और कर्मचारियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर निर्भर है।
