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जल, जंगल, जमीन के बड़े पैरोकार तपेश्वर सिंह भाटी दिला रहे हैं न्याय

वनों, पर्यावरण और वन्यजीवों के हक में कानूनी लड़ाई के लड़ाके

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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जल, जंगल, जमीन के बड़े पैरोकार तपेश्वर सिंह भाटी दिला रहे हैं न्याय
जल, जंगल, जमीन के बड़े पैरोकार तपेश्वर सिंह भाटी दिला रहे हैं न्याय
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नागरिक अभिव्यक्ति. कोटा

25 से अधिक वर्षों से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर काम कर रहे पर्यावरणविद् और एडवोकेट तपेश्वर सिंह भाटी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वे वनों, तालाबों, पर्यावरण और वन्यजीवों के सबसे बड़े पैरोकार और इनके हक में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले जांबाज लड़ाके हैं। बारां जिले के शाहाबाद में बिजली प्लांट लगाने के लिए एक लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाने की योजना के खिलाफ सबसे पहले वे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंचे और लोगों को जागरूक किया। इस लड़ाई की शुरुआत सबसे पहले भाटी ने ही की थी।

तालाबों को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त करवाना हो, उद्योगों के प्रदूषण को रोकना हो, जंगलों के विनाश को रोकना हो या अवैध खनन को, भाटी जनहित में कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर न्याय दिलवाते हैं। वे संवेदनशील इलाकों में होने वाले अवैध खनन और वन्यजीवों के शिकार के खिलाफ वन विभाग के साथ मिलकर सीधे ग्राउंड पर भी पैनी नजर रखते हैं। चंबल के जलीय जीवों, कछुओं, घड़ियालों और स्थानीय पक्षियों के आवासों की सुरक्षा के लिए उनके द्वारा चलाए गए जन-जागरूकता अभियानों के कारण उन्हें पूरे संभाग में पर्यावरण का सजग प्रहरी माना जाता है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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