पुणे-जयपुर ट्रेन के कोटा ठहराव पर जनरल कोच में पकौड़ी खरीदते समय एक संदिग्ध की पहचान, पुलिस ने 3 से 4 मिनट में तीनों को दबोचा। कैलिफोर्निया में बैठे हैंडलर से जुड़े तारों की जांच में जुटीं एजेंसियां।
नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
मायानगरी मुंबई के पॉश इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर जब अंधाधुंध गोलियों की गूंज सुनाई दी, तब किसी ने कल्पना नहीं की थी कि इस हाई-प्रोफाइल अपराध के तार राजस्थान के कोचिंग हब कोटा से जुड़ेंगे। मुंबई से फरार होकर नेपाल भागने की फिराक में बदमाशों की योजना उस समय धरी की धरी रह गई, जब मात्र 3 से 5 मिनट के खामोश और सटीक ऑपरेशन ने बदमाशों को धरदबोचा।
पुणे-जयपुर ट्रेन के केवल 10 मिनट के कोटा ठहराव के दौरान, जरा सी चूक से अपराधियों के भीड़भाड़ में ओझल होने का खतरा था। लेकिन, स्पेशल टीम ने स्टेशन के सभी एंट्री-एक्जिट गेट, प्लेटफॉर्म और बोगियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था। सादा कपड़ों में तैनात खुफिया जवानों ने
ट्रेन के जनरल कोच में दबिश दी तो उस वक्त एक आरोपी गेट के पास पकौड़ी खरीद रहा था और बाकी दो ऊपर की बर्थ पर बेखबर सो रहे थे।
पुलिसकर्मी उनके पास यात्री की तरह भी जाकर भी बैठ गए। बिना किसी अफरा-तफरी के मुख्य हमलावरों बिहार के ऋतिक तथा हरियाणा के रेहान व फूल सिंह को दबोच लिया। पुलिस ने पकौड़ी खरीदते समय ही बदमाश की पहचान की थी और बदमाशों को उनकी इसी एक गलती से हथकड़ी तक पहुंचा दिया। इस मामले में अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हथियार सप्लाई करने वाले हरियाणा के सोनीपत निवासी कुणाल, सुमित तथा यूपी की राधा व बबीता को भी गिरफ्तार किया है। यह घटना इस तरफ भी इशारा करती है कि किस तरह देश के बड़े महानगरों में आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद गैंगस्टर कोटा रेल नेटवर्क को अपने सुरक्षित 'एस्केप रूट' की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, इस समूचे घटनाक्रम ने कोटा पुलिस के खुफिया तंत्र, त्वरित एक्शन और अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह की कार्यकुशलता को भी देश के सामने साबित किया है। लेकिन, अब पुलिस प्रशासन को आने वाले दिनों में होटल-सराय सत्यापन अभियानों और स्टेशन परिसरों में चौकसी को निरंतर कड़ा रखना होगा, ताकि हमारा अमन-चैन हमेशा कायम रहे। क्योंकि शिक्षा और शांति के प्रतीक कोटा शहर को किसी भी आपराधिक गैंग का 'ट्रांजिट कॉरिडोर' या शरणस्थली नहीं बनने दिया जा सकता।
'कैलिफोर्निया टू कोटा': रैकी, जंगी ऐप, विदेशी हैंडलर और 34 हजार की सुपारी
इस समूचे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू अपराधियों का संगठित ढांचा और डिजिटल मोडस ऑपरेंडी है। पुलिस पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि इस हमले की पूरी पटकथा भारत में नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका के कैलिफोर्निया में बैठकर लिखी गई थी।
विदेश में बैठा सरगना: हरियाणा के पानीपत मूल का अनिल पंडित, जो वर्ष 2023 में कनाडा के रास्ते कैलिफोर्निया पहुँचा था, वह खुद को लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क का प्रमुख संचालक और मजबूत कंधा बताता है।
सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क: पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए अपराधियों ने पारंपरिक सेल्युलर नेटवर्क या व्हाट्सएप के बजाय एन्क्रिप्टेड 'जंगी ऐप' का इस्तेमाल किया। इस एप्लिकेशन की खासियत यह है कि इसमें अकाउंट बनाने के लिए वास्तविक फोन नंबर की आवश्यकता नहीं होती, जिससे डेटा सर्वर पर सुरक्षित रहता है।
सस्ते शूटरों की भर्ती: सिंडिकेट अब स्थापित अपराधियों के बजाय ऐसे बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा है जिन्हें विदेश में नौकरी दिलाने, पैसे और ऐशो-आराम का झाँसा दिया जा सके। महज 34 हजार रुपये के मामूली खर्च, इंदौर-मुंबई में रुकने का इंतजाम और पकौड़ी-चोपाटी घूमने का लालच देकर इन 18 से 22 वर्ष के युवाओं को मौत के खेल में धकेल दिया गया।
पिस्टल से लेकर खर्च तक के कोड : गैंग का नेक्सेस सावधानी से पूरे काम को अंजाम दे रहा था। पिस्टल पहुंचाने से लेकर होटल, खाना, नाश्ता और हर जरुरी चीज उनको मुहैया करवाई जा रही थी। जिसका खर्च गैंग उठा रही थी। इसका तरीका भी अलग था। न युवकाें को पैसा देना न ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करना। सिर्फ मोबाइल पर क्यू आर कोड लेकर वो गैंग के व्यक्ति को भेजते और पलक झपकते ही पेमेंट हो जाता। ऐसे में उनकी मौजूदा उपस्थिति का अंदाजा लगाना लगभग नामूमकिन रहता है।
बड़े चेहरों की रेकी : बिश्नोई गैंग का मुख्य मकसद खौफ और दहशत का साम्राज्य कायम करना है। मुंबई के जुहू इलाके में लगभग एक महीने तक डेरा डालकर इन शूटरों ने सिर्फ टाइगर श्रॉफ ही नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन, आमिर खान, अक्षय कुमार और सलमान खान जैसे कलाकारों के आवासों व आवाजाही के रास्तों की भी रेकी की थी। उन्होंने संडे फुटबॉल क्लब से बाहर निकलते समय जब टाइगर का सुरक्षा घेरा कम था, तब घात लगाकर गोलियाँ चलाई गईं। हालाँकि, मुख्य हमलावर की पिस्तौल में कारतूस अटक जाने की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।
ऑडियो धमकियाँ और पुराना पैटर्न : बिश्नोई गैंग द्वारा रंगदारी वसूलने, बॉलीवुड में अपनी हनक बनाने और सार्वजनिक रूप से धमकियाँ देने का यह ट्रेंड कोई नया नहीं है। यह सिंडिकेट हमेशा से अपने खौफ को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाता रहा है। इस बार भी हमले के तुरंत बाद जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए मुंबई फिल्म उद्योग और अन्य प्रमुख हस्तियों को खुलेआम चेतावनी दी गई, जो इनकी सोची-समझी पब्लिसिटी रणनीति का हिस्सा है।
हमारे हीरो: स्पीकर, सीएम और डीजीपी ने सराहा
जिला पुलिस कप्तान तेजस्वीनी गौतम के नेतृत्व और उनकी मुस्तैद टीम की यह तत्परता निसंदेह साधुवाद की हकदार है, जिसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर डीजीपी राजीव शर्मा तक ने खूब सराहा है। इस साहसिक और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली इस विशेष टीम में थाना रेलवे कॉलोनी के थानाधिकारी रामस्वरूप मीणा और कॉन्स्टेबल मदनलाल, अजीत, राजेंद्र, जितेन्द्र व ओमप्रकाश शामिल रहे, जिन्होंने अपनी चौकसी से अपराधियों को बेदम किया। इनके साथ ही थाना भीमगंजमंडी के थानाधिकारी रामविलास मीणा, एएसआई कृष्णगोपाल मीणा और कॉन्स्टेबल लोकेश, मोहित कुमार, अम्बाराम व प्रेम कुमार ने भी इस पूरी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। जिला विशेष टीम (DST) के एएसआई लईक अहमद, एएसआई बहादुर सिंह, एएसआई सुरेन्द्र सिंह, हेड कॉन्स्टेबल अशोक सिंह, महेंद्र सिंह, संजय शर्मा तथा कॉन्स्टेबल परमेश्वर, प्रदीप शर्मा, शौकत खान, जयवीर, इरफान, मामराज, दिनेश, देवेंद्र व प्रद्युमन की मुस्तैदी का भी बड़ा योगदान रहा। वहीं, साइबर सैल से एएसआई अजय सिंह, हेड कॉन्स्टेबल सुरेश और कॉन्स्टेबल इन्द्र सिंह, सुनील चंदेल व शैलेन्द्र ने तकनीकी मदद के जरिए इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में पूरा साथ दिया। इसके अलावा एजीटीएफ से एएसआई प्रताप सिंह और आरपीएफ से इंस्पेक्टर चोप सिंह डाबर, एएसआई सुमित रघुवंशी व कप्तान ने भी इस संयुक्त कार्रवाई में अपनी पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। कोटा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता, आपसी तालमेल और त्वरित कार्रवाई की वजह से ही अपराधियों के खतरनाक मंसूबे पूरी तरह नाकाम हो सके।
बड़ी चुनौती ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा थी, प्लान ए और प्लान बी दोनों तैयार थे
मुंबई पुलिस से मुझे महत्वपूर्ण इनपुट मिला था। गंभीरता को देखते हुए तत्काल टीमें सक्रिय की गईं और रणनीति तैयार की गई। जवानों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस पूरे ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों की सुरक्षा थी। हमें यह पता नहीं था कि संदिग्धों के पास किस तरह के और कितनी क्षमता के हथियार हो सकते हैं। ऐसे में कार्रवाई के दौरान जरा-सी चूक भी बहुत भारी पड़ सकती थी। हमें आरोपियों को पकड़ना भी था और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी थी। हमने प्लान ए के साथ प्लान बी भी तैयार रखा था। अगर पहली रणनीति के मुताबिक कार्रवाई नहीं हो पाती, तो दूसरे विकल्प के तहत भी संदिग्धों को पकड़ने की तैयारी थी। हमारी कोशिश थी कि किसी भी स्थिति में वे कोटा से निकलकर आगे न जा सकें। पुलिस टीमों के बेहतर समन्वय और जवानों की सतर्कता से हम इस ऑपरेशन में सफल रहे। तीनों को मुंबई पुलिस को सौंप दिया हैं। इस कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों ने जिम्मेदारी के साथ काम किया।
- तेजस्वनी गौतम, एसपी कोटा शहर
लॉरेंस बिश्नोई गैंग : देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियों को निशाना बनाया
29 मई 2022 (सिद्धू मूसेवाला): पंजाब में अपने गांव में कार सवार हमलावरों ने सिंगर को घेरकर 30 राउंड फायर किए, जिससे उनकी मौत हो गई। 25 नवंबर 2023 (गिप्पी ग्रेवाल): कनाडा के वैंकूवर में घर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग की, कोई चोट नहीं आई। 14 अप्रैल 2024 (सलमान खान): मुंबई के बांद्रा इलाके में सुबह करीब 4:50 बजे बाइक सवार शूटरों ने घर के बाहर 5 राउंड फायरिंग की। सितंबर 2024 (एपी ढिल्लों): कनाडा में इंडो-कनाडाई सिंगर के घर के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई। 12 अक्टूबर 2024 (बाबा सिद्दीकी): ऑफिस के बाहर 3 हमलावरों ने 6 से 9 राउंड फायरिंग की, जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 11-12 सितंबर 2025 (दिशा पाटनी): बरेली स्थित घर के बाहर गोलियां चलाईं, हालांकि परिवार सुरक्षित रहा। 15 अक्टूबर 2025 (कपिल शर्मा): कनाडा में कैफे के बाहर फायरिंग से इमारत क्षतिग्रस्त हुई। 1 फरवरी 2026 (रोहित शेट्टी): रात 12:45 बजे फिल्म डायरेक्टर के जुहू स्थित घर के बाहर बाइक सवारों ने 5 राउंड फायरिंग की। 11 जून 2026 (गुरु रंधावा): दिल्ली में जिम के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई, जहां सिंगर जुड़े हुए थे। 18 अक्टूबर 2026 (टाइगर श्रॉफ): टाइगर श्रॉफ पर 3 हमलावरों ने 5 राउंड फायरिंग की, उनको नहीं लगी।
