नागरिक अभिव्यक्ति @ बूंदी
विप्र फाउंडेशन कोटा जॉन की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण मुरारी चतुर्वेदी ने मंगलेश्वरी मठ, रंगबाड़ी रोड कोटा में आयोजित वर्चुअल कोर कमेटी की बैठक में नई कार्यकारिणी की घोषणा की। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भुवनेश्वर शर्मा ‘चच्चू भैया’ की सहमति और संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले निर्देशों के बाद पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। नई कार्यकारिणी में बूंदी जिले को प्रमुख स्थान मिला है। जिले के दो पदाधिकारियों को प्रदेश महामंत्री सहित कई लोगों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है।
विप्र फाउंडेशन के बूंदी जिलाध्यक्ष गणेश गौत्तम ने बताया कि जिले से राष्ट्रीय संत पं. ज्योतिशंकर शर्मा ‘पुराणाचार्य’, नवल किशोर शर्मा, विधायक हरिमोहन शर्मा, पूर्व विधायक अशोक डोगरा, ममता शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा और रामबाबू शर्मा लाखेरी को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया है।
प्रदेश महामंत्री पद पर तालेड़ा के अमित शर्मा रघु और कापरेन के शैलेंद्र दुबे को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर कापरेन के तेज नारायण दुबे, केशोरायपाटन के जगदीश दाधीच एडवोकेट, इंदरगढ़ के हेमराज गौतम, नैनवां के विनोद बिहारी शर्मा, हिंडोली के हनुमान व्यास और तालेड़ा के रामचरण गौतम को नियुक्त किया गया है।
इसी तरह प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर बूंदी के गिरीश ओझा और रामचरण श्रृंगी, हिंडोली के महेंद्र शर्मा, देई के पुरुषोत्तम गौत्तम, इंदरगढ़ के जगदीश शर्मा, केशोरायपाटन के दीनबंधु गौतम और सुवासा के जगदीश शर्मा को शामिल किया गया है। प्रदेश मंत्री पद पर तलवास के सूर्यकुमार पंचोली, लाखेरी के शिवनारायण जोशी, करवर के नरेंद्र शर्मा, नैनवां के आशीष जोशी और हिंडोली की प्रगति जोशी को दायित्व सौंपा गया है।
विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में तालेड़ा के भंवरलाल शर्मा, मुकेश दाधीच, वैद्य कृष्ण मुरारी रेवाल, बूंदी के अनंत दाधीच और इंदरगढ़ के राजेंद्र शर्मा को कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है।
परशुराम कुंड में प्रतिमा अनावरण में भागीदारी का आह्वान
प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण मुरारी चतुर्वेदी ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड के तट पर भगवान परशुराम की 54 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण प्रस्तावित है। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कार्यक्रम में विप्र समाज की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही संगठन की नीतियों के अनुरूप समाज के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र ब्राह्मण परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
