भविष्य की शिक्षा का केंद्र डिग्री नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और तकनीक का समन्वय होगा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारा आगामी लक्ष्य विवि को एक ऐसे 'नॉलेज हब' और 'स्किल सेंटर' के रूप में स्थापित करना है, जहां विद्यार्थी पढ़ाई के साथ रोजगार के लिए जरूरी कौशल भी हासिल कर सके। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, एआई आधारित विद्यार्थी सहायता प्रणाली विकसित करने, उद्योगों और संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाने तथा प्रशिक्षण और इंटर्नशिप आधारित शिक्षण को विस्तार देने पर काम किया जा रहा है। हमारा फोकस समावेशी शिक्षा भी है। उद्देश्य यह है कि सामाजिक, आर्थिक या भौगोलिक कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई में बाधा न बनें। मेरा मानना है कि यदि शिक्षा को वास्तव में भविष्य के अनुरूप बनाना है तो उसे गांव-ढाणी तक पहुंचाने के साथ-साथ रोजगार और कौशल से भी जोड़ना होगा। वीएमओयू की पूरी तैयारी इसी दिशा में है।
विवि में मुख्यमंत्री बालिका दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत महिलाओं और छात्राओं की फीस पुनर्भरण व्यवस्था को और सुगम बनाया जा रहा है। वहीं, कामकाजी युवाओं और ग्रामीण विद्यार्थियों की सुविधा के लिए प्रवेश व परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाया जा रहा है। कंप्यूटर एप्लीकेशन में ऑनलाइन डिप्लोमा और पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में ऑनलाइन डिप्लोमा जैसे कौशल विकास पाठ्यक्रमों के जरिए शिक्षा की पहुंच का विस्तार भी किया जा रहा है।
