मैं जब कैंपस की प्रयोगशालाओं और अकादमिक ब्लॉकों का राउंड लेता हूं, तो मुझे बदलते भारत की एक नई तस्वीर दिखाई देती है। हमने आने वाले 5 वर्षों, यानी वर्ष 2031 तक कोटा विवि को देश के टॉप-50 उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल करने का लक्ष्य तय किया है। ग्लोबल और लोकल, दोनों स्तरों पर रणनीति बनाई है। दुनिया के 10 से अधिक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ एमओयू (समझौते) किए हैं। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ग्लोबल एक्सपोजर के सीधे रास्ते खुले हैं। 'प्रधानमंत्री कौशल स्किल हब सेंटर' तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स कर रहे युवाओं को आत्मविश्वास से भर रहा है। अब पीएचडी पंजीयन के पहले दिन से ही शोध अवधि की गणना शुरू कर दी गई है, जिससे समय बचेगा। हमारा संकल्प है कि यहां होने वाला अनुसंधान केवल लाइब्रेरी की अलमारियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका न्यूनतम 30% हिस्सा सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और सामाजिक सुधारों में काम आए।
उच्च शिक्षा के द्वार खोले
विश्वविद्यालय सिर्फ चारदीवारी के भीतर काम नहीं कर रहा है। ग्राउंड स्तर पर, हमने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए पचईकलां और खनौतियों सहित आधा दर्जन ग्रामीण क्षेत्रों को गोद लिया है, जहां हमारे छात्र स्वच्छता और शिक्षा के प्रोजेक्ट्स चला रहे हैं। हमने हाल ही में आयोजित राज्य पात्रता परीक्षा SET-2026 को 37 विभिन्न विषयों में सफलता पूर्वक आयोजित कर प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए उच्च शिक्षा में करियर के नए द्वार खोले हैं।
