कोटा। कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय वायु सेना के जांबाज और शहीद स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा पर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'ऑपरेशन सफेद सागर' नाम से वेब सीरीज आई है. इस वेब सीरीज में उनकी पूरी कहानी बताई गई है. इसका ट्रेलर शुक्रवार को रिलीज हुआ था. वहीं सीरीज का पहला पार्ट शनिवार को रिलीज हुआ. आहूजा का परिवार कोटा नहीं रहता है, लेकिन उनका पैतृक मकान कोटा में ही है. उनके पड़ोसी का कहना है कि वेब सीरीज का ट्रेलर उन्होंने देखा है. इस सीरीज को वे देखेंगे और फिर सोसायटी के लोगों को भी दिखाएंगे. इस सीरीज में बहुत सारी चीजें और घटनाएं ठीक वैसी हैं, जैसी हमने देखी थी.
पूरी सोसायटी को दिखाई जाएगी सीरीज
कोटा के रेलवे हाउसिंग सोसाइटी में अजय आहूजा का मकान है. उनकी कॉलोनी की हाउसिंग समिति के सेक्रेटरी सुबोध बल्दुआ ने शहीद से जुड़ी यादें साझा की. उन्होंने बताया कि अजय आहूजा कोटा में एक स्कूटर चलाते थे. इस स्कूटर को भी फिल्म में दिखाया गया है. इसके साथ ही उनके अंत्येष्टि के समय का फोटो भी सेम वैसा ही नजर आ रहा है. अजय के देहांत के समय उनके बेटे अंकुर की उम्र के बच्चे को ही फिल्म में दिखाया गया है. उनका कहना है कि फिल्म रिलीज हो गई है. इसको मैं पहले देखूंगा. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इस वेब सीरीज के सभी पार्ट आ जाने पर पूरी सोसायटी के लोगों को कॉमन हॉल में मूवी दिखाई जाएगी.
अंतिम बार कोटा में हुई थी मुलाकात
सुबोध बल्दुआ ने बताया कि कारगिल युद्ध के पहले अजय छुट्टी पर आए हुए थे. जब वे वापस ड्यूटी पर लौट रहे थे, तब शाम को ट्रेन पकड़ने स्टेशन चले गए थे. जाते समय वह अपना टिफिन घर पर ही भूल गए थे. उस जमाने में मोबाइल नहीं थे. इसलिए उन्होंने पीसीओ से फोन किया था. इसके बाद उनकी मां श्यामा आंटी ने मुझे टिफिन स्टेशन पर दे जाने के लिए कहा था. मैं खुद यह टिफिन देने के लिए स्टेशन गया था और अंतिम बार उससे मैं ही कोटा में मिला था. इसके बाद तो उनके शहीद होने की खबर ही आई थी.
पिता की करते थे सेवा
सुबोध बल्दुआ का कहना है कि उनके और अजय आहूजा के मकान में एक दीवार का अंतर है. उनके सामने ही 1992 में अजय के पिता पीएल आहूजा ने घर बनाया था. अजय तब नौकरी में था और जब एक महीने की छुट्टी आता था, तो अपने पिता की काफी केयर करता था. उनके पिता रेलवे में कैशियर थे. ऐसे में जब वह ड्यूटी से आते थे, तो पहले ही अजय उनके इंतजार में बाहर खड़े हो जाते थे. वे पिता को कहते थे कि आप साइकिल छोड़ दीजिए, वे उनकी साइकिल को लेकर घर तक आते थे. हमें मई 1999 में कारगिल युद्ध का वह दिन भी याद है, जब उनके शहीद होने की सूचना या कोटा आई थी. देखते ही देखते पूरा मंजर बदल गया था.
कोटा में पैतृक मकान, लेकिन कोई नहीं रहता
शहीद अजय आहूजा के भाई विजय की पत्नी सुधा आहूजा से ईटीवी भारत में टेलीफोन पर बातचीत की थी, तब उन्होंने बताया कि उनकी मां श्यामा आहूजा के साथ परिवार अलीगढ़ शिफ्ट हो गया है. उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला था और अभी सभी वहीं शिफ्ट हो गए. जबकि उनके ससुर पीएल आहूजा की डेथ हो गई है. अजय आहूजा की पत्नी अलका वर्तमान में दिल्ली में रहती है. जबकि उनका बेटा अंकुर यूएसए में रह रहा है. उनका कोटा में मकान जरूर है, जिस पर वे आते रहते हैं. हालांकि पूरा परिवार अभी कोटा से दूर है. उन्होंने अपने मकान को किराए पर दिया हुआ है.
शहीद की मूर्ति, उनके नाम से बने पार्क की हालत खराब
माला रोड हॉट बाजार में अजय आहूजा की स्मृति में पार्क बनाया गया था. इस पार्क में उनकी मूर्ति भी लगाई गई, लेकिन पार्क के हालात काफी खराब हैं. एडवोकेट हिमांशु सिंह का कहना है कि आवारा जानवर आकर यहां गंदगी फैला देते हैं. वाकिंग ट्रेक पर चला नहीं जा सकता है. जगह-जगह पर खरपतवार उग गई है. पार्क में लगी हुई बेंच टूट गई है. पार्क बनने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया गया. पिछले कांग्रेस के शासनकाल में इसको दुरुस्त करवाया गया था, लेकिन वापस हालत जस के तस हो गए. पार्क के नजदीक रहने वाले हरप्रीत सिंह आनंद का कहना है कि पार्क के बीच लगी मूर्ति की कैप भी काफी समय से टूटी हुई है. रात होते ही यहां असामाजिक तत्वों और शराबियों का जमावड़ा लग जाता है. इसकी वजह से महिलाएं और बच्चे पार्क आने से डरते हैं. पार्क की बदहाली हमारे साथ-साथ पड़ोसी भी परेशान हैं।
