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वाई-फाई सुरक्षित नहीं तो मोबाइल-लैपटॉप का डेटा खतरे में

साइबर सुरक्षा | राउटर का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें, डब्ल्यूपीए3 सुरक्षा रखें; अनजान डिवाइस दिखे तो तुरंत नेटवर्क से हटाएं, सुरक्षित रहे

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वाई-फाई सुरक्षित नहीं तो मोबाइल-लैपटॉप का डेटा खतरे में
वाई-फाई सुरक्षित नहीं तो मोबाइल-लैपटॉप का डेटा खतरे में
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नागरिक अभिव्यक्ति @ जयपुर

घर या दफ्तर का वाई-फाई सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और अन्य डिवाइस भी साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकते हैं। कमजोर सुरक्षा के कारण हैकर नेटवर्क में सेंध लगाकर डेटा चोरी, साइबर फ्रॉड या निजी जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इससे बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है।

आसान सावधानियां अपनाकर रहे सुरक्षित

पहले देखें, नेटवर्क से कौन जुड़ा है

मोबाइल या लैपटॉप को अपने वाई-फाई से कनेक्ट करें। ब्राउजर में राउटर का एडमिन पेज खोलें। यह सामान्यतः 192.168.1.1 या 192.168.0.1 जैसे एड्रेस से खुलता है। लॉगिन के बाद ‘कनेक्टेड डिवाइसेस’ या ‘डिवाइस लिस्ट’ देखें। अनजान मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिवाइस नजर आए तो उसे तुरंत हटाएं।

राउटर का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें

कई राउटर में शुरुआत से सामान्य ‘एडमिन’ पासवर्ड रहता है। इसे बदलना जरूरी है। नया पासवर्ड लंबा और मजबूत रखें। इसमें बड़े-छोटेअक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल करें।

स्मार्ट डिवाइस के लिए गेस्ट नेटवर्क बनाएं

राउटर का फर्मवेयर भी नियमित अपडेट करें। स्मार्ट टीवी, कैमरे और अन्य आईओटी डिवाइस को मुख्य नेटवर्क के बजाय गेस्ट नेटवर्क से जोड़ें।

वाई-फाई का नाम पहचान वाला न रखें

वाई-फाई के नाम यानी एसएसआईडी में अपना नाम, मोबाइल नंबर, मकान नंबर या ऐसी जानकारी न रखें जिससे आपकी पहचान आसानी से हो सके। राउटर के ब्रांड का नाम भी रखने से बचें।

पुरानी सुरक्षा तकनीक से बचें

राउटर में डब्ल्यूपीए3 एन्क्रिप्शन उपलब्ध है तो उसे चालू रखें। यह विकल्प नहीं हो तो डब्ल्यूपीए2-एईएस इस्तेमाल करें। पुराने डब्ल्यूईपी और डब्ल्यूपीए सुरक्षा मोड का उपयोग नहीं करें।

डब्ल्यूपीएस और रिमोट मैनेजमेंट बंद रखें

डब्ल्यूपीएस यानी वाई-फाई प्रोटेक्टेडसेटअप को बंद रखना बेहतर है। रिमोट मैनेजमेंट भी डिसेबल रखें। इससे इंटरनेट के जरिए बाहर से राउटर की सेटिंग तक पहुंचने का खतरा कम होता है।

ठगी हो तो 1930 पर कॉल करें

वाई-फाई से छेड़छाड़, हैकिंग या साइबर अपराध होने पर पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें। वित्तीय साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें। राजस्थानपुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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